आसिम मुनीर के ईरान पहुंचने से पहले भारत ने बिछा दी बिसात, यहां उतारी मिलिट्री
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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
ब्यूरो प्रमुख दुर्गेश अवस्थी
ईरान जंग के बीच कई ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिसका व्यापक असर पड़ने की संभावना है. आतंकवाद को स्टेट पॉलिसी की तरह इस्तेमाल करने वाला पाकिस्तान संकट के बीच खुद को शांतिदूत बनाने की हर संभव कोशिश कर रहा है. इन सबके बीच भारत ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसकी धमक दूर तक सुनाई देने लगी है. पाकिस्तान आर्मी चीफ आसिम मुनीर के ईरान पहुंचने से पहले कूटनीति की बिसात पर भारत ने ऐसी चाल चली है, जिससे दुश्मनों का टेंशन में आना स्वाभाविक है. वेस्ट एशिया में तनाव और होर्मुज क्राइसिस के बीच इंडियन आर्मी की टुकड़ी सेंट्रल एशिया में उतरी है. इसका उद्देश्य अकारण किसी को टार्गेट करना नहीं, बल्कि शांति के लिए हिमालयी प्रयास करना और ऐतिहासिक दोस्ती को और मजबूत करना है. इंडियन आर्मी उज्बेकिस्तान की सेना के साथ ‘डस्टलिक’ (Dustlik) सैन्य अभ्यास के लिए नामंगन पहुंची है. भारत के इस कदम से न केवल भारत-उज्बेकिस्तान के संबंध और मजबूत होंगे, बल्कि सेंट्रल एशिया में भारत को सामरिक बढ़त भी हासिल होगी.
उज्बेकिस्तान के नामंगन क्षेत्र में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘डस्टलिक’ (Dustlik) का सातवां संस्करण शुरू हो गया है. भारतीय सेना के अनुसार, इस अभ्यास का उद्घाटन समारोह गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में आयोजित किया गया, जिसमें दोनों देशों की सेनाओं ने भाग लिया. यह संयुक्त सैन्य अभ्यास 12 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 तक चलेगा और इसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल, क्षमता और आपसी सहयोग को और मजबूत करना है. इस अभ्यास में मुख्य रूप से संयुक्त विशेष अभियानों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिनका लक्ष्य अवैध सशस्त्र समूहों को निष्क्रिय करना है. भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशालय जनसंपर्क ने बताया कि ‘डस्टलिक’ अभ्यास दोनों देशों के बीच वैश्विक शांति और सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है और रक्षा सहयोग को नई दिशा देता है.
इस बात पर खास जोर
उद्घाटन समारोह में उज़्बेकिस्तान के पूर्वी सैन्य जिले के कमांडर मेजर जनरल सईदोव ओयबेक अजादोविच मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. इस दौरान दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने अभ्यास के महत्व और इसकी रणनीतिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य पहाड़ी (semi-mountainous) क्षेत्रों में संयुक्त अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने की क्षमता को विकसित करना है. इसमें सैनिकों की शारीरिक फिटनेस, संयुक्त योजना निर्माण, सामरिक अभ्यास और विशेष हथियारों के उपयोग से संबंधित कौशल पर विशेष जोर दिया जाएगा.
दुश्मनों का सफाया है उद्देश्य
अभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाएं कई महत्वपूर्ण सैन्य गतिविधियों का अभ्यास करेंगी, जिनमें भूमि नेविगेशन, दुश्मन के ठिकानों पर हमला (strike missions) और कब्जे वाले क्षेत्रों को मुक्त कराना शामिल है. इसके साथ ही, दोनों पक्ष एक साझा संचालन प्रणाली (unified operational algorithm) विकसित करेंगे, जिससे कमांड और नियंत्रण संरचनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके. भारतीय दल इस दौरान उज़्बेकिस्तान की सेना की कार्यप्रणाली और अभ्यास पद्धतियों को समझेगा, वहीं अपने अनुभव और तकनीकों को भी साझा करेगा. इस प्रकार, यह अभ्यास न केवल सैन्य कौशल को बढ़ाने का अवसर है, बल्कि ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान का भी महत्वपूर्ण मंच है.
मजबूत होगी क्षेत्रीय सुरक्षा
अभ्यास का समापन 48 घंटे के एक व्यापक वैलिडेशन एक्सरसाइज (validation exercise) के साथ होगा, जिसमें संयुक्त अभियानों की रणनीतियों और सामरिक अभ्यासों की प्रभावशीलता का परीक्षण किया जाएगा. ‘डस्टलिक’ अभ्यास के माध्यम से दोनों देशों के सैनिकों के बीच आपसी समझ, विश्वास और सौहार्द (camaraderie) को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही यह अभ्यास भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संयुक्त सैन्य अभ्यास क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने और आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण साबित होते हैं.