महिला आरक्षण के लिए मोदी सरकार ने निकाल लिया 'रूल 66' वाला ब्रह्मास्त्र!
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यूपी लाइव न्यूज 24 उत्तर प्रदेश
ब्यूरो प्रमुख दुर्गेश अवस्थी
सियासत के अखाड़े में जब सीधे दांव से बात न बने, तो संसदीय नियमों की मोटी किताब से वो पेंच निकाले जाते हैं, जो सामने वाले को चारो खाने चित कर दें. आज संसद में वही नजारा दिखने वाला है. जब पूरा ‘INDIA अलायंस’, इस बात पर सीना ठोक रहा था कि वो महिला आरक्षण बिल के समर्थन में तो हैं, लेकिन इसके साथ जो ‘परिसीमन’ की शर्त जोड़ी गई है, उसे वो किसी भी कीमत पर पास नहीं होने देंगे. विपक्ष को लग रहा था कि वो संसद में अपनी संख्या बल के दम पर सरकार का खेल बिगाड़ देगा. उसी वक्त मोदी सरकार ने लोकसभा की रूल बुक से एक ऐसा अस्त्र निकाल लिया है, जिसने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है. सरकार ने एक ऐसा चक्रव्यूह रचा है, जिसमें विपक्ष का फंसना लगभग तय है. इस चक्रव्यूह का नाम है- रूल 66 का निलंबन!
संसदीय कार्यप्रणाली की किताब ‘रूल्स ऑफ प्रोसीजर एंड कंडक्ट ऑफ बिजनेस’ का नियम 66 खास तकनीकी प्रावधान है. यह नियम तब लागू होता है जब कोई एक विधेयक पूरी तरह से किसी दूसरे विधेयक पर निर्भर होता है. यानी अगर बिल-B पास नहीं हुआ, तो बिल-A का कोई वजूद या मतलब नहीं रह जाएगा. इस नियम के तहत, ऐसे मामलों में दूसरे विधेयक (जो अभी पेंडिंग है) के पास होने की उम्मीद में, पहले विधेयक को पेश करने की अनुमति दी जाती है. इसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब लगे कि कोई व्यवधान नहीं आने वाला. यह नियम सुनिश्चित करता है कि निर्भरता वाले विधेयक बिना किसी तकनीकी बाधा के सदन में पेश किए जा सकें.
तो फिर मोदी सरकार इस ‘रूल 66’ को सस्पेंड क्यों कर रही है?
आम तौर पर जब सदन में दो या तीन अलग-अलग बिल आते हैं तो तकनीकी रूप से उन पर चर्चा और वोटिंग अलग-अलग कराने का प्रावधान होता है. विपक्ष इसी ताक में बैठा था. विपक्ष की योजना थी कि जब ‘महिला आरक्षण बिल’ पर वोटिंग होगी, तो वे इसके पक्ष में (हां में) वोट डालेंगे. लेकिन जब ‘परिसीमन बिल’ पर वोटिंग होगी, तो वे इसके खिलाफ (ना में) वोट डालकर इसे गिरा देंगे.
सरकार को विपक्ष की इस चाल का अंदाजा था. इसलिए, सरकार ने फैसला किया है कि कल लोकसभा में इस ‘रूल 66’ के प्रावधान को ही सस्पेंड करने का प्रस्ताव लाया जाएगा. रूल 66 कंडक्ट आफ बिज़नेस के सस्पेंड होते ही सरकार के सामने से वह तकनीकी बाध्यता पूरी तरह से खत्म हो जाएगी, जिसमें उसे अलग-अलग बिलों के लिए अलग-अलग वोटिंग का प्रस्ताव लाना पड़ता.
आसान शब्दों में कहें तो, रूल 66 को सस्पेंड करके सरकार तीनों बिलों को एक ही धागे में पिरो देगी. सरकार के सामने इन तीनों बिलों को एक साथ लोकसभा में पारित करने के प्रस्ताव को लाने का रास्ता एकदम साफ हो जाएगा.
विपक्ष के लिए आगे कुआं, पीछे खाई!
रूल 66 के निलंबन का सीधा मतलब है कि अब महिला आरक्षण, परिसीमन और यूनियन टेरिटरी से जुड़े बिल अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही ‘महा-प्रस्ताव’ के रूप में वोटिंग के लिए रखे जाएंगे. अब INDIA अलायंस के सांसदों के पास अब अलग-अलग बटन दबाने का विकल्प नहीं होगा. या तो उन्हें सारे बिल को पास कराना होगा या सारे बिल को गिराना होगा.
अगर विपक्ष परिसीमन का विरोध करने के लिए वोटिंग में ‘ना’ (No) का बटन दबाता है, तो वह अपने आप ‘महिला आरक्षण’ के भी खिलाफ हो जाएगा. फिर सरकार पूरे देश में डंका पीटेगी कि देखिए, ये लोग महिला विरोधी हैं, इन्होंने महिलाओं के आरक्षण को गिरा दिया.
और अगर विपक्ष महिलाओं के डर से ‘हां’ का बटन दबाता है, तो महिला आरक्षण के साथ-साथ ‘परिसीमन बिल’ भी मक्खन की तरह पास हो जाएगा, जिसका वे पुरजोर विरोध कर रहे थे. यह सरकार की तरफ से बिछाई गई वो बिसात है, जिसमें विपक्ष का हर दांव उलटा पड़ना तय है.
आज संसद में होगा क्या?
लोकसभा और विधानसभा की सीटों को बढ़ाए जाने का प्रस्ताव रखने वाला ‘डीलिमिटेशन बिल’ कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल लोकसभा में पेश करेंगे. इसके साथ ही वह ‘संविधान संशोधन विधेयक’ भी सदन के पटल पर रखेंगे. गृहमंत्री अमित शाह ‘यूनियन टेरिटरी बिल’ को लोकसभा में पेश करेंगे. इन तीनों बिलों को सदन में पेश करने के बाद, सरकार इन्हें एक ही झटके में, एक साथ पारित कराने का ‘कंबाइंड’ प्रस्ताव लाएगी.