LUCKNOW / 01-04-2026

आस्था का अभ्युदय: 56वीं 'रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा' ने भरी भक्ति की हुंकार, सरोजनीनगर से अवधपुरी की ओर प्रस्थान

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मुख्य संपादक प्रवीण सैनी लखनऊ 

लखनऊ। सरोजनीनगर की पावन धरा बुधवार को एक बार फिर आध्यात्मिक चेतना की साक्षी बनी। सनातन संस्कारों को जीवंत करने और जन-मानस को 'राम-काज' से जोड़ने के संकल्प के साथ विधायक डॉ राजेश्वर सिंह द्वारा शुरू की गई रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा आज 56वें पड़ाव पर पहुंच गई। ग्रामसभा कुरौनी से मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली के लिए विधायक ने बुधवार को यात्रा को रवाना किया।

यात्रा का प्रस्थान केवल एक यात्रा की शुरुआत नहीं, बल्कि एक उत्सव का प्राकट्य रहा। ढोल-नगाड़ों की थाप और 'जय श्रीराम' के गगनभेदी उद्घोष से संपूर्ण वातावरण राममय हो गया।

लगभग तीन वर्षों से जारी यह 'सेवा-यज्ञ' आज अपनी 56वीं कड़ी में प्रवेश कर चुका है। विधायक डॉ राजेश्वर सिंह की यह पहल सरोजनीनगर की आध्यात्मिक पहचान का 'हस्ताक्षर' बन चुकी है, जो आधुनिकता के दौर में भी सनातन मूल्यों को सहेजने का कार्य कर रही है।

यह यात्रा केवल तीर्थाटन नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को प्रभु की चौखट तक पहुंचाने का एक 'श्रद्धा-सेतु' है। इसमें शामिल श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति का तेज और आँखों में रामलला के दर्शन की अभिलाषा स्पष्ट झलक रही थी।

यह यात्रा सेवा, श्रद्धा और संस्कारों के जिस बीज से अंकुरित हुई थी, वह आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। रामरथ न केवल अयोध्या का मार्ग प्रशस्त कर रहा है, बल्कि दिलों में भक्ति और समाज में एकता के भाव को भी सुदृढ़ कर रहा है।

सरोजनीनगर से निरंतर निकल रही यह यात्रा दर्शाती है कि सेवाभाव जब संकल्प का रूप ले लेता है, तो वह जन-आस्था का महाकुंभ बन जाता है। श्रद्धालुओं के लिए भोजन, विश्राम और दर्शन की सुगम व्यवस्था इस यात्रा को 'अनुशासन और अपनत्व' की मिसाल बनाती है।

रामरथ का यह गौरवशाली सफर निरंतर जारी है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी जड़ों से जुड़े रहने की एक नई परिभाषा गढ़ रहा है।

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